माहे रजाबुल मुरज्जब में किस बुज़रुग का उर्स किस तारीख़ को होता है?

माहे रजाबुल मुरज्जब में किस बुज़रुग का उर्स किस तारीख़ को होता है?

“माहे रजाबुल मुरज्जब मुबारक हो” “रजब” का माना है ताज़ीम करना,अहले अरब इस महीने की ख़ास ताज़ीम किया करते थे, इस को अल असब भी कहते हैं यानी तेज़ बहाव, इस माहे मुबारक में तौबा करने वालो पर रहमत का बहाव तेज़ हो जाता और इबादत करने वालो पर क़ुबूलियत के...
माहे जमादियुल उखरा में किस बुज़रुग का उर्स किस तारिख को होता है?

माहे जमादियुल उखरा में किस बुज़रुग का उर्स किस तारिख को होता है?

“माहे जमादियुल उखरा मुबारक” :- जमादि का माना है “बर्फ का जमना” जब इस महीने का नाम रखा गया तब सख्त सरदी ठण्ड थी और कुछ मुल्को में बर्फ पड़ रही थी, तालाब वगैरह जमे हुए थे, इस लिए इसे माहे जमादीउल-अव्वल कहा जाता है, Read this also सरकार महबूबे...
माहे जमादि उल ऊला में किस बुज़रुग का उर्स किस तारिख को होता है?

माहे जमादि उल ऊला में किस बुज़रुग का उर्स किस तारिख को होता है?

“माहे जमादि उल ऊला मुबारक” जमादि का माना है “बर्फ का जमना” जब इस महीने का नाम रखा गया तब सख्त सरदी ठण्ड थी और कुछ मुल्को में बर्फ पड़ रही थी, तालाब वगैरह जमे हुए थे, इस लिए इसे माहे जमादीउल-अव्वल कहा जाता है, माहे जमादि उल ऊला का चाँद देख कर...
माहे रबीउल आखिर में किस बुज़रुग किस तारीख को होता है

माहे रबीउल आखिर में किस बुज़रुग किस तारीख को होता है

सभी आशिकाने रसूल को ईदुल गौसिया का महीना मुबारक हो,. रबी का माना है “बहार” माहे रबीउल आखिर यानी बहार का दूसरा महीना, “रबीउल आखिर के ख़ास दिन” Read this also शैखुल इस्लाम ताजुल औलिया शैख़ बहाउद्दीन सोहरवर्दी ज़करिया मुल्तानी रहमतुल्लाह अलैह की...
माहे रबीउल अव्वल में किस बुज़रुग का उर्स किस तारिख को होता है

माहे रबीउल अव्वल में किस बुज़रुग का उर्स किस तारिख को होता है

सब आशिकाने रसूल को हुज़ूर हबीबुल्लाह खैरे ख़लक़िल्लह अशरफुल अम्बिया रसूले आज़म ख़ातिमुल अम्बिया रहमतुल्लिल आलमीन सुल्ताने दारैन सरवरे काइनात नूर वाले आक़ा शाफाये उम्मत मुहम्मद मुस्तफा ﷺ की विलादत का महीना मुबारक हो, Read this also ज़िल हिज्जा के महीने में किस बुज़रुग का...
माहे सफारुल मुज़फ्फर के महीने में किस बुज़रुग का उर्स किस तारीख को होता है

माहे सफारुल मुज़फ्फर के महीने में किस बुज़रुग का उर्स किस तारीख को होता है

सफर का माना है “खाली होना” इस महीने में अहले अरब खाने पीने की चीज़ों की लिए बाहर निकल जाते थे और उन के मकान खाली होते थे | माहे सफर का चाँद देख कर सूरह अल नस्र पढ़ें | ﺑِﺴْﻢِ ﺍﻟﻠَّﻪِ ﺍﻟﺮَّﺣْﻤَٰﻦِ ﺍﻟﺮَّﺣِﻴﻢِ ﺇِﺫَﺍ ﺟَﺎﺀَ ﻧَﺼْﺮُ ﺍﻟﻠَّﻪِ ﻭَﺍﻟْﻔَﺘْﺢُ ﻭَﺭَﺃَﻳْﺖَ...